- पूर्वी सिंहभूम को ‘बाल मित्र जिला’ बनाने के सरयू राय के प्रस्ताव को अर्जुन मुंडा का समर्थन
चतुर्थ बाल मेला 2025 का समापन | 7 दिनों में 10,000 से ज्यादा बच्चों की भागीदारी | 18 तरह की खेल प्रतियोगिताएं
जमशेदपुर। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि हमें बदलते दौर में इस बात का ध्यान रखना होगा कि हम केवल वस्तुओं का ही नहीं, बल्कि ‘व्यक्तित्व’ का भी निर्माण करें। उन्होंने पूर्वी सिंहभूम जिले को ‘बाल मित्र जिला’ (Child-Friendly District) बनाने के विधायक सरयू राय के प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया और इसे एक रचनात्मक दिशा बताया।
श्री मुंडा बुधवार (20 नवंबर 2025) को जमशेदपुर में आयोजित 7 दिवसीय ‘चतुर्थ बाल मेला-2025’ के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
‘बालपन से बांकपन’ तक का सफर
अर्जुन मुंडा ने अपने संबोधन में कहा, “बाल मेला से एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण हुआ है। आज जब आत्मीयता संस्कारविहीन होती जा रही है, यहाँ आकर सुकून मिला।” उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी शिशु का भविष्य उसके परिवेश पर निर्भर करता है। हमें अपनी परंपराओं को निभाते हुए बच्चों को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।
10 हजार बच्चों का महाकुंभ
मेला के संरक्षक और जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने बताया कि पिछले 7 दिनों में शहर के विभिन्न हिस्सों से 10,000 से अधिक बच्चों ने मेले में शिरकत की।
- 18 प्रकार के इवेंट्स: बच्चों के लिए खेल और हुनर से जुड़े 18 तरह के आयोजन हुए।
- समावेशी पहल: मेले में उन बच्चों को भी शामिल किया गया जो स्कूल नहीं जा पाते या कूड़ा बीनने का काम करते हैं, ताकि उनकी प्रतिभा को भी मंच मिल सके।
- 42 स्टॉल: मेले में ज्ञान-विज्ञान और मनोरंजन के 42 स्टॉल लगाए गए थे।
ज्ञात हो कि इस मेले का उद्घाटन वित्त मंत्री ने किया था, जबकि समापन पूर्व सीएम के हाथों हुआ। सरयू राय ने वादा किया कि पाँचवां बाल मेला इससे भी भव्य होगा।
📜 जमशेदपुर घोषणा पत्र: ‘बाल मित्र जिला’ बनाने का संकल्प
विश्व बाल दिवस (20 नवंबर 2025) के अवसर पर मंच से ‘जमशेदपुर घोषणा पत्र’ जारी किया गया, जिसे आमजन को समर्पित किया गया। इसका उद्देश्य पूर्वी सिंहभूम को एक आदर्श ‘बाल मित्र जिला’ बनाना है। इसके प्रमुख मानक निम्नलिखित तय किए गए हैं:
- शून्य बाल श्रम: जिले का कोई भी बच्चा बाल श्रम में संलग्न न हो।
- शिक्षा: 14 वर्ष से कम आयु का कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न हो।
- बाल विवाह मुक्त: लड़की की शादी 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष से पहले न हो।
- सुरक्षा: कोई भी बच्चा बेघर या उपेक्षित न रहे और शोषण का शिकार न हो।
इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ‘बाल मित्र जिला टास्क फोर्स’ के गठन और सभी सरकारी विभागों (पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा) के साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया गया।
सम्मान और पुरस्कार
समारोह के दौरान अतिथियों, निर्णायकों और विजेता बच्चों को सम्मानित किया गया।
- बाल वैज्ञानिक विजेता: अयंक राज, आयुष कुमार, श्रीराम दुबे और विवेक कुमार ने अपने-अपने ग्रुप में प्रथम पुरस्कार जीता।
- विशेष भेंट: मनीता महतो ने अर्जुन मुंडा को फूलों से बनी एक विशेष तस्वीर भेंट की।
इस अवसर पर समाजसेवी अशोक गोयल, नीरज सिंह, सुधीर सिंह, आशुतोष राय, और निर्णायक मंडल के सदस्यों सहित शहर के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।













