जमशेदपुर, 19 नवंबर, 2025: बाहर से आने वाले कवियों और साहित्यकारों का स्वागत जमशेदपुर की साहित्यिक परंपरा रही है। कल शाम, कुल्टी, धनबाद से आए उर्दू कवि मेराज अहमद मेराज के सम्मान में सुंदरवन कॉलोनी स्थित प्रो. अहमद बद्र के आवास पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। अनवर अदीब ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मिसाल अहमद ने कुरान की तिलावत से कार्यक्रम की शुरुआत की। मेजबान कवि अहमद बद्र ने अतिथि कवि मेराज अहमद मेराज का परिचय कराया। उन्होंने बताया कि मेराज साहब एक कुशल कवि हैं और धनबाद निवासियों की नई पीढ़ी में कविता की अलख जगा रहे हैं।
गोष्ठी में कई प्रसिद्ध कवियों ने भाग लिया और अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। इनमें अहमद बद्र, गौहर अज़ीज़, रिज़वान औरंगाबादी, सैयद अहसन, नज़ीर अहमद नज़ीर, सद्दाम गनी, सफीउल्लाह सफी, सकलैन मुश्ताक और शोएब अख्तर जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन मशहूर शायर गौहर अज़ीज़ ने किया। इस अवसर पर जमशेदपुर से प्रकाशित कुछ पुस्तकें अतिथियों को भेंट की गईं, जिनमें असलम बद्र की पुस्तक ‘शौक हर रंग’, अफसर काज़मी की ‘तालीस्मे सफ़र’, अहमद बद्र की पुस्तक ‘सैबां शीशे का’, रिज़वान औरंगाबादी की पुस्तक ‘जौके सुखन’ और गौहर अज़ीज़ की पुस्तक ‘अँधेरे उजाले’ शामिल थीं। संगोष्ठी में पढ़ी गई ग़ज़लों के कुछ शेर इस प्रकार हैं: दुनिया में अभी भी कई गंभीर समस्याएँ हैं।
लिखने का हुनर हो तो मुकाम बहुत हैं… मेराज अहमद मेराज
ज़िंदगी एक रास्ता बनाने वाली है।
ज़िंदगी कोई सफ़र नहीं… अहमद बद्र
हमारे मुल्क के हालात बदलने वाले हैं।
ये सिर्फ़ एक ख़बर है… गौहर अज़ीज़
दुनिया की कड़वाहट को हर कोई कोसता है।
कितने लोग रौशनी के साथ जीते हैं… रिज़वान औरंगाबादी
लहरों से लड़ते-लड़ते कोशिशें थक गईं और सो गईं।
डूबते हुए की नज़रें किनारे पर टिकी हैं… सईद अहसन
ऐ नज़ीर, अब ग़ज़ल की गोद में,
कायनात आने दो… नज़ीर अहमद नज़ीर
बिस्मिल का दिल सलामती की दुआ भी करे, तो क्या माँगे?
वो तड़पती हुई चाहत को मिटने नहीं देता… सद्दाम गनी
जब मुझे तुम्हारी याद आने लगती है,
प्यार अपने पंख फैलाने लगा है… सफीउल्लाह सफी
तुम उसे ईर्ष्या भरी नज़रों से क्यों देखते हो?
मेरे प्यार, उर्दू तुम्हारी अपनी भाषा है… सकलैन मुश्ताक
बसंत की रौनक ने मुझे भटका दिया था।
रहम करने वाले ने मुझे मेरी मंजिल दिखा दी… शोएब अख्तर













