सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के ओबरा थाना क्षेत्र में 15 नवम्बर 2025 की शाम को एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया। बिल्ली-मारकुंडी इलाके की एक पत्थर खदान में खनन कार्य के दौरान अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा धंस गया। इसके चलते वहां काम कर रहे 12 से 15 मजदूर और एक कंप्रेसर ऑपरेटर मलबे के नीचे दब गए। यह हादसा मजदूरों के सामान्य कार्य-काल के दौरान हुआ, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना का विस्तार
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, खनन कार्य के समय पहाड़ी में दरारें आ गई थीं, लेकिन अचानक बड़े पैमाने पर पत्थर और मिट्टी का टीला गिरने से मजदूरों के पास बचने का कोई मौका नहीं बचा। हादसे के तुरंत बाद अन्य श्रमिकों ने हल्ला मचाया और अधिकारियों व प्रशासन को सूचना दी।
राहत और बचाव कार्य तेजी से आरंभ हुआ। जिला प्रशासन ने फौरन जेसीबी, भारी मशीनरी, SDRF और NDRF को मौके पर बुलाया। अब तक एक मजदूर का शव मलबे से निकाला जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। मलबे की मोटाई और जगह की दुर्गमता के चलते राहत कार्य में काफी दिक्कतें आ रही हैं। रिश्तेदार और साथी मजदूर घटनास्थल पर अपनों के सुरक्षित निकलने की दुआ कर रहे हैं।
प्रशासन की कार्रवाई और सरकारी ऐलान
जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा दुःख जताया और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन भी दिया गया है। दुर्घटना के बाद पूरे इलाके में खनन पर रोक लगाते हुए प्रशासन ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल
यह हादसा एक बार फिर खनन क्षेत्रों में सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी को उजागर करता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पत्थर खनन के दौरान कई बार सुरक्षा के मानक गंभीर रूप से नजरअंदाज किए जाते हैं, जिसकी वजह से ऐसे हादसे होते रहते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि दोषी ठेकेदारों और खनन कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
सोनभद्र का यह हादसा न केवल मजदूरों की जानमाल की सुरक्षा के लिहाज़ से एक गंभीर चेतावनी है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि जीवन की कीमत पर मुनाफाखोरी या लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है, और पूरे राज्य से मदद व संवेदना की लहर उमड़ रही है।













