- “जय हो” द्वारा आयोजित ‘अबकी बार सौ पार’ दलमा ट्रैकिंग कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न
जमशेदपुर, 09 नवम्बर 2025: रविवार की सुबह उत्साह और जोश से भरी रही जब “जय हो” द्वारा आयोजित दलमा ट्रैकिंग कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ। “अबकी बार सौ पार” के नारे के साथ आयोजित इस ऐतिहासिक ट्रैकिंग में करीब 122 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया — जिनमें छह वर्ष के बच्चे से लेकर 66 वर्ष तक के वरिष्ठ नागरिक शामिल थे। इस आयोजन की शुरुआत सुबह 05:45 बजे होटल वेव इंटरनेशनल के सामने असंगी गांव स्थित स्टार्टिंग पॉइंट से हुई।
सुबह तीन बजे से ही प्रतिभागियों में उत्साह देखने को मिला। सभी लोग तैयारी में जुटे थे। लगभग 6:30 बजे ट्रैकिंग की शुरुआत हुई, और 11:30 बजे तक कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस दौरान सभी प्रतिभागियों ने दलमा हिल के प्राकृतिक सौंदर्य और साहसिक अनुभव का भरपूर आनंद लिया।

🏞️ “अबकी बार सौ पार” ऐतिहासिक ट्रैकिंग अभियान के प्रतिभागी
इस ऐतिहासिक ट्रैकिंग अभियान में बड़ी संख्या में उत्साही प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें प्रमुख रूप से हरेंदु शर्मा, डॉ. कमल शुक्ला, सुशील कुमार सिंह, डॉ. ताहिर हुसैन, अर्जुन ठाकुर, हर्ष सिंह, सचिन मुर्मू, हिमशिखा शर्मा, उज्जवल कृष्ण, तरुण कृष्ण, महेश जोशी, जे.पी.एन. पाठक, पी.के. मिश्रा, मिथिलेश कुमार, अरविंद कुमार, सचिन कुमार, ललन साह, उपेन्द्र ओझा, सुभाष चंद्र महतो, मनीष सिंह, सतीश सिंह, सूरज सिंह, सीमा ठाकुर, साक्षी सिंह, अर्पिता सिंह, संस्कृति ठाकुर, अंश सिंह, विवान ठाकुर, वेद सिंह, रजत डे, हंसराज सिंह, सुरेंद्र मौर्य, राजीव रंजन, मनीष कुमार शर्मा, राघव मिश्र, अजय कुमार, सच्चिदानंद (राजा आर्य के पिता), दयानंद, निलय पाठक, चन्द्र शेखर सिन्हा, रीक घोष, रवि तंतुबाई, जॉय घोष, प्रणब कुमार पाल, रवि महतो, सुनील राय, मंजय यादव, मुन्ना दुबे, एस.एन. सिंह, सनातन मिश्र, सार्थक मिश्रा, श्रीमती सुलता डे (पत्नी रजत कुमार डे), कन्हैया कुमार शर्मा, बी.एल. गुप्ता, सतनाम सिंह, जावेद अली खान, नमिता प्रमाणिक, राकेश शर्मा (सेना के जवान), सिम्मी सिंह (हंसराज सिंह की पत्नी), गुनगुन, अनिल कुमार मौर्य, तृषा मौर्य, सनी सिंह परमार, सोनिया, अशोक प्रमाणिक, शुभम् शुक्ला, एस.पी. सरकार, राजेश सिन्हा, सीमा सिन्हा, तनीषा सहाय और राजकुमार महापात्रा और अन्य सभी साथी शामिल हुए।
इनके अतिरिक्त लॉ कॉलेज से 15 छात्र-छात्राएं, हिन्द आईटीआई के 23 बच्चे और नवोदय से भी कुछ बच्चे शामिल हुए।
इस विशाल भागीदारी ने “जय हो” टीम की इस मुहिम को नई ऊँचाइयाँ दीं — जहाँ सेहत, अनुशासन और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम में “फौजी एंड फ्रेंड्स” टीम के संयोजक हरेंदु शर्मा ने सभी से अपील की कि —
“ट्रैकिंग केवल फिटनेस या मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी की याद दिलाता है। कोई भी व्यक्ति खाने-पीने का पैकेट, बोतल या कचरा फेंके नहीं। हर किसी को अपना कचरा अपने बैग में रखकर नीचे लाना है और निर्धारित स्थान पर डालना है। हम सभी प्रबुद्ध नागरिक हैं और पर्यावरण की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है।”
ट्रैकिंग के दौरान सभी प्रतिभागियों ने करीब 5 किलोमीटर का दुर्गम पहाड़ी रास्ता तय किया, जो समुद्र तल से लगभग 2500 से 2600 फीट ऊंचाई तक फैला हुआ है। दलमा हिल की हरियाली, घाटियों और नयनाभिराम दृश्यों ने प्रतिभागियों की थकान मिटा दी।

दलमा ट्रैकिंग कार्यक्रम के नेतृत्व की जिम्मेदारी सुशील कुमार सिंह ने बखूबी निभाई और पूरे आयोजन को सफलतापूर्वक दिशा दी। प्रस्थान से पूर्व उन्होंने सभी प्रतिभागियों को आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि यह कोई रेस नहीं, बल्कि टीम भावना और आत्मविश्वास की परीक्षा है। उन्होंने प्रतिभागियों को समूह में चलने, हर 20 मिनट में पानी या ग्लूकोज पीने और एक-दूसरे की सहायता करने की सलाह दी।
सुशील कुमार सिंह ने दलमा ट्रैकिंग कार्यक्रम के दौरान टीम को संबोधित करते हुए कहा —
“हम सब आज यहाँ केवल ट्रैकिंग करने नहीं आए हैं, बल्कि खुद को प्रकृति के और करीब महसूस करने आए हैं। यह कोई रेस नहीं है, बल्कि एक टीम भावना और आत्मविश्वास की यात्रा है। आप सभी अपने-अपने सामर्थ्य के अनुसार समूह में चलें, किसी से प्रतिस्पर्धा न करें और एक-दूसरे का सहयोग करें। हर 20 मिनट में पानी या ग्लूकोज अवश्य लें ताकि शरीर में ऊर्जा बनी रहे।
ट्रैकिंग के दौरान सावधानी बरतें, क्योंकि रास्ता ऊबड़-खाबड़ है और थोड़ा फिसलन भरा भी हो सकता है। सबसे जरूरी बात — हम यहाँ आनंद लेने आए हैं, कचरा फैलाने नहीं। कोई भी व्यक्ति खाने-पीने का रैपर, बोतल या पैकेट जंगल में न फेंके। जो भी कचरा हो, उसे अपने बैग में रखें और नीचे उतरकर कूड़ेदान में डालें। यह हमारा नैतिक और पर्यावरणीय दायित्व है। महिलाएं, बच्चे और वरिष्ठ सदस्य सबसे मूल्यवान प्रतिभागी हैं, उनकी सुरक्षा हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम सभी फौजी एंड फ्रेंड्स के सदस्य हैं, हमें अनुशासन, एकता और जिम्मेदारी की मिसाल पेश करनी है। सुरक्षित ट्रैकिंग ही सफल ट्रैकिंग है — यही ‘जय हो’ टीम की असली पहचान है।”
“जय हो” टीम ने इस ट्रेकिंग के लिए पहले से ही विशेष दिशा-निर्देश जारी किए थे — सभी प्रतिभागियों को सुबह छह बजे तक स्टार्टिंग प्वाइंट पर पहुंचना था। काली टी-शर्ट या “जय हो” की वर्दी पहनने की सलाह दी गई थी। हर किसी को पानी, ग्लूकोज, चॉकलेट और आवश्यक दवाएं साथ रखने के लिए कहा गया था। टीम भावना, सहयोग और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।

ट्रैकिंग के दौरान डॉ. कमल शुक्ला ने हंसते हुए एक सार्थक कथा सुनाई —
“जो कछुआ की चाल से चलेगा वह ऊपर ज़रूर पहुँच जाएगा और जो खरगोश जैसा दौड़ेगा वह बीच में सो जाएगा।” इस सहज और प्रभावी उपमा से उन्होंने संकेत दिया कि ट्रैकिंग में तेज़ी नहीं बल्कि निरंतरता, संयम और धैर्य ही सफलता दिलाते हैं। उनकी यह बात न केवल चढ़ाई के दौरान बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में संतुलित गति अपनाने की सीख बनकर उभरी और प्रतिभागियों को आत्म-नियंत्रण व सहयोग की याद दिला गई।
कार्यक्रम की सफलता के बाद हरेंदु शर्मा ने कहा —
“हमारी कोशिश है कि इस तरह के आयोजन से लोग न केवल प्रकृति के करीब आएं, बल्कि अपने स्वास्थ्य के प्रति भी सजग रहें। अगली बार हमारा लक्ष्य और भी बड़ा होगा।”
महिलाओं और बच्चों की भागीदारी ने इस ट्रैकिंग को विशेष बना दिया। सबसे छोटा प्रतिभागी छह साल का बच्चा था, जबकि सबसे वरिष्ठ सदस्य 66 वर्ष के थे। हर उम्र के लोग एक साथ जब पहाड़ी पर चढ़ रहे थे, तो मानो “एक भारत, एक परिवार” की भावना जीवंत हो उठी।

ट्रैकिंग के समापन पर सभी ने एक-दूसरे को बधाई दी और “जय हिंद” के नारों से वातावरण गूंज उठा। इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि अगर इच्छाशक्ति हो तो उम्र या परिस्थिति कोई बाधा नहीं बनती।
“अबकी बार सौ पार” थीम पर आयोजित दलमा ट्रैकिंग 2025 न केवल फिटनेस और साहस का प्रतीक बना, बल्कि इसने पर्यावरण-जागरूकता, अनुशासन और टीम भावना का भी प्रेरक संदेश दिया। “फौजी एंड फ्रेंड्स – जय हो” टीम ने दिखा दिया कि रोमांच और जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकते हैं।
क्या है – “जय हो”
“जय हो” – सेहत, अनुशासन और एकता का जनआंदोलन
तीनों सेनाओं — आर्मी, नेवी और एयरफोर्स — से सेवानिवृत्त हुए कुछ जांबाज़ जवानों ने जब यह महसूस किया कि देश की सेवा केवल वर्दी पहनकर ही नहीं, बल्कि स्वस्थ और जागरूक नागरिक बनकर भी की जा सकती है, तब उन्होंने अपने जीवन में एक नई शुरुआत की। उन्होंने यह निश्चय किया कि प्रतिदिन सुबह एक घंटा अपने स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए समर्पित करेंगे। इस उद्देश्य से वे हर दिन सुबह एकत्रित होने लगे और योग, कसरत व अन्य हेल्थ एक्टिविटीज़ करने लगे।
यही से “जय हो” टीम का जन्म हुआ — एक ऐसा समूह जो केवल व्यायाम या योग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेहत, अनुशासन और समाजसेवा का प्रतीक बन गया। इस टीम ने दिखाया कि अगर व्यक्ति रोज़ाना एक घंटा अपने शरीर को दे, तो जीवन में संतुलन, आत्मविश्वास और ऊर्जा स्वतः आ जाती है।

उनका यह अनुशासन और समर्पण आसपास के लोगों के लिए प्रेरणा बन गया। लोगों ने देखा कि सेवानिवृत्त सैनिक भी अपने स्वास्थ्य को लेकर इतने गंभीर और सजग हैं, तो आम नागरिक क्यों नहीं? धीरे-धीरे समाज के अन्य वर्ग — बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग — भी इस मुहिम से जुड़ने लगे। सभी ने महसूस किया कि स्वस्थ रहना ही असली संपत्ति है और यदि शरीर स्वस्थ है तो मन, समाज और राष्ट्र सशक्त रहेंगे।
आज “जय हो” केवल एक फिटनेस समूह नहीं, बल्कि एक सकारात्मक सामाजिक आंदोलन है। यह आंदोलन इस विचार पर आधारित है कि स्वस्थ नागरिक ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। इस टीम ने यह भी साबित किया कि उम्र कभी बाधा नहीं होती — केवल इच्छाशक्ति और निरंतरता की जरूरत होती है।
इन सैनिकों की पहल ने समाज में सेहत और सजगता का नया अध्याय खोला है। उनकी लगन ने लोगों को यह सिखाया कि जीवन में जिम्मेदारी केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने शरीर, परिवार और पर्यावरण की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आज “जय हो” टीम के सदस्य हर सुबह उत्साह और अनुशासन के साथ एकत्रित होते हैं, एक-दूसरे को प्रेरित करते हैं और समाज को यह संदेश देते हैं कि —
“स्वस्थ तन, सशक्त मन और एकजुट समाज ही सच्चे भारत की पहचान है।” 🇮🇳
जय हो! जय हिंद!







