- पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने कहा — भाजपा घाटशिला में ऐतिहासिक जीत की ओर अग्रसर
- बाबूलाल सोरेन के समर्थन में खुलकर सामने आया आदिवासी समाज
घाटशिला, 1 नवंबर 2025 | संवाददाता रिपोर्ट: घाटशिला उपचुनाव में इस बार राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी को लगातार बढ़ता जनसमर्थन मिल रहा है। शनिवार को गुड़ाबांधा प्रखंड के विभिन्न गांवों के सैकड़ों आदिवासी ग्रामीणों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
इनमें कई गांवों के पारंपरिक ग्राम प्रधान (मांझी बाबा) और सामाजिक प्रतिनिधि भी शामिल थे। ग्रामीणों ने कहा कि “कई वर्षों से हम विधायक और मंत्री चुनते रहे, लेकिन घाटशिला के विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।” उन्होंने बताया कि सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव अब भी बना हुआ है, इसलिए जनता बदलाव चाहती है।
“अब जनता समझ चुकी है कि विकास केवल भाजपा ही कर सकती है” — चम्पाई सोरेन
इस मौके पर मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने कहा कि
“भाजपा घाटशिला में ऐतिहासिक जीत की ओर अग्रसर है। जनता अब समझ चुकी है कि क्षेत्र का विकास केवल भाजपा ही कर सकती है।”
उन्होंने आगे कहा कि “फूलपाल, जुगीशोल और बेदिया जैसे इलाकों में बांग्लादेशी घुसपैठिए आदिवासी और सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। समाज का अस्तित्व बचाने के लिए अब मूलवासी और आदिवासी समाज को एकजुट होना होगा।”
चाईबासा लाठीचार्ज पर सरकार को घेरा
पूर्व सीएम चम्पाई सोरेन ने चाईबासा में हुई लाठीचार्ज घटना को राज्य सरकार की बर्बरता बताया।
उन्होंने तीखे अंदाज में कहा —
“सरकार आपकी, आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज आप करवाओ, आंसू गैस फायर आप करवाओ, फर्जी एफआईआर आप करवाओ, लोगों को जेल आप भेजो… और गलती विपक्ष की बताओ? जनता को बेवकूफ बनाना बंद करो।”
बाबूलाल सोरेन को बढ़ता जनसमर्थन
भाजपा उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन के पक्ष में अब आदिवासी समाज खुलकर सामने आ गया है। उनके प्रचार अभियान में वीर सिदो-कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू भी शामिल हैं, जिन्हें युवाओं का भरपूर समर्थन मिल रहा है।
आदिवासी अस्मिता की रक्षा की अपील
आज के कार्यक्रम में संथाल परगना के “देश परगना” सूरजू टुडू भी मौजूद रहे।
उन्होंने कहा —
“आदिवासी समाज को जागरूक होकर अपने समाज, अपनी विरासत और अपने अस्तित्व को बचाने की जरूरत है। अगर बांग्लादेशी घुसपैठ पर रोक नहीं लगी, तो घाटशिला भी वही स्थिति झेलेगा जो आज पाकुड़ में है, जहाँ आदिवासी समाज अल्पसंख्यक हो चुका है।”
भाजपा के लिए मजबूत होता जनाधार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने घाटशिला में सामाजिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर अपनी पकड़ मजबूत की है। आदिवासी समुदाय के लगातार जुड़ने से चुनावी समीकरणों में झामुमो के लिए चुनौती और बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर ग्रामीण मुद्दों — विकास, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा — पर भाजपा का फोकस अब निर्णायक साबित हो सकता है।













