मौसम मनोरंजन चुनाव टेक्नोलॉजी खेल क्राइम जॉब सोशल लाइफस्टाइल देश-विदेश व्यापार मोटिवेशनल मूवी धार्मिक त्योहार Inspirational गजब-दूनिया
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

ताज़ा खबर | सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर बहन श्वेता सिंह कीर्ति का बड़ा दावा — “ये आत्महत्या नहीं, हत्या थी”

Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427
On: October 31, 2025 9:12 PM
Follow Us:
सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर बहन का बड़ा दावा
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

  • श्वेता सिंह कीर्ति का खुलासा: “सुशांत की मौत हत्या थी — दो लोगों ने किया”

Sushant Singh Rajput’s death mystery: अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने हाल ही में एक इंटरव्यू में दावा किया है कि उनके भाई की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या थी। श्वेता ने बताया कि एक अमेरिका और एक मुंबई स्थित दो अलग-अलग साइकिक (psychic) ने उनसे संपर्क कर, बिना किसी पूर्व जानकारी के, कहा कि दो लोगों ने सुशांत की हत्या की। श्वेता ने मौत के उस दृश्य में पाई गई कुछ बातों — जैसे पंखे और बिस्तर के बीच जगह न होना, किसी स्टूल का न होना और गले पर पतली चेन जैसा निशान — को भी संदिग्ध बताया और आत्महत्या के निष्कर्ष पर सवाल उठाए। इस बयान के बाद मामला फिर से सुर्खियों में आ गया और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।

सीबीआई की पहले की जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि मौत आत्महत्या की श्रेणी में आती है और किसी साजिश के स्पष्ट सबूत नहीं मिले। इसके बावजूद परिवार और समर्थक सीबीआई के निष्कर्ष से असहमत हैं; परिवार ने रिपोर्ट के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार करने का संकेत दिया है। हालिया बयानों और मीडिया कवरेज के बाद ‘Justice for Sushant’ समर्थन फिर सक्रिय हुआ है।

5 साल बाद फिर उठे सवाल

‘पवित्र रिश्ता’ जैसे चर्चित टीवी शो से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाले और ‘काय पो छे!’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाले सुशांत सिंह राजपूत की मौत को पांच साल बीत चुके हैं। जून 2020 की वह सुबह आज भी लाखों फैंस के दिलों में दर्द छोड़ गई थी, जब खबर आई कि 34 वर्षीय अभिनेता ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली। लेकिन अब उनकी बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने एक बार फिर इस मामले को सुर्खियों में ला दिया है।

श्वेता का चौंकाने वाला बयान

श्वेता ने पत्रकार शुभंकर मिश्रा से बातचीत में दावा किया कि उनके भाई की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या थी। उन्होंने कहा कि दो अलग-अलग साइकिक (Spiritual Mediums) — एक अमेरिका में और दूसरी मुंबई में — दोनों ने एक जैसी बात कही कि सुशांत की हत्या दो लोगों ने की थी

“वो दोनों एक-दूसरे को नहीं जानती थीं। फिर भी दोनों ने कहा कि दो लोग आए थे और सुशांत की हत्या की। यह बात मुझे अंदर तक हिला गई,” — श्वेता सिंह कीर्ति।

कमरे की स्थिति पर उठाए सवाल

श्वेता ने आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुशांत के कमरे में आत्महत्या संभव ही नहीं थी।
उन्होंने कहा —

“जो फैन था और जो बेड था, उनके बीच इतनी जगह नहीं थी कि कोई अपने पैर लटका सके। अगर कोई आत्महत्या करता है, तो स्टूल या किसी सहारे की जरूरत होती है — लेकिन वहां कोई स्टूल नहीं था। जिस निशान की बात की जा रही है, वो दुपट्टे का नहीं बल्कि पतली चेन जैसा निशान था।”

 
 
 
 
 
View this post on Instagram
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

 

A post shared by Shubhankar Mishra (@theshubhankarmishra)

जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर असहमति

सुशांत की मौत के बाद मुंबई पुलिस, ईडी, एनसीबी और सीबीआई — चार एजेंसियों ने जांच की थी। सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट में कहा गया था कि किसी साजिश, हत्या या उकसावे का सबूत नहीं मिला। लेकिन श्वेता और परिवार इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हैं।

परिवार के वकील वरुण सिंह ने कहा —

“अगर सीबीआई सच्चाई लाना चाहती, तो सारे सबूत सार्वजनिक करती। हम इस रिपोर्ट के खिलाफ विरोध याचिका दायर करेंगे।”

परिवार और फैंस की जिद — “इंसाफ चाहिए”

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के पांच साल बाद भी उनके प्रशंसक सोशल मीडिया पर न्याय की मांग करते हैं।
श्वेता सिंह कीर्ति अक्सर अपने भाई की याद में पोस्ट करती हैं और ‘Justice for Sushant’ अभियान को जिंदा रखती हैं।

विशेष बिंदु

  • सुशांत की मौत 14 जून 2020 को मुंबई में हुई थी।
  • सीबीआई रिपोर्ट: आत्महत्या, किसी साजिश के प्रमाण नहीं।
  • परिवार का दावा: “हत्या को आत्महत्या बताने की साजिश।”
  • श्वेता सिंह कीर्ति का दावा: दो अलग-अलग साइकिक ने बताया “दो लोगों ने हत्या की।”

पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन सुशांत सिंह राजपूत की मौत आज भी रहस्य और सवालों से घिरी हुई है। उनकी बहन श्वेता के नए बयान ने एक बार फिर पुराने घाव हरे कर दिए हैं — और यह चर्चा फिर छेड़ दी है कि क्या ‘सुशांत केस’ का सच कभी सामने आएगा?

समीक्षा

  1. दावे की प्रकृति और भरोसेमंदी
    • श्वेता के बयानों का जो मुख्य आधार रखा गया है वह दो साइकिकों के कथन हैं — ये अनुभवात्मक/शख्सीय गवाह हैं, वैज्ञानिक या फॉरेंसिक प्रमाण नहीं। साइकिकों के दावे सामान्यतः सबूत-आधारित न्यायिक प्रक्रियाओं में निर्णायक नहीं माने जाते। इसलिए इन दावों को सावधानी से परखा जाना चाहिए।
  2. फॉरेंसिक/कानूनी निष्कर्षों से टकराव
    • सीबीआई और एम्स फॉरेंसिक रिपोर्टों ने पूर्व में हत्या के ठोस प्रमाण न मिलने का निष्कर्ष दिया था। श्वेता और परिवार का असहमत रहना सार्वजनिक भावनाओं को बढ़ाता है, पर न्यायिक प्रणाली में असहमति को ठोस नए सबूतों से मजबूत करना आवश्यक होता है।
  3. मीडिया और सोशल मीडिया का प्रभाव
    • ऐसे दावे मीडिया-चक्र और सोशल प्लेटफॉर्म पर भावनात्मक प्रतिक्रिया जन्माते हैं — इससे ट्रायल-बाय-पब्लिक और जांच पर दबाव बन सकता है। हालाँकि पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग जायज है, पर अटकलें और अनपुष्ट दावे मामले की जाँच-प्रक्रिया को गुमराह भी कर सकते हैं।
  4. कानूनी और विज्ञान आधारित रास्ता
    • यदि परिवार को नए सुसंगत सबूत (डिजिटल, फॉरेंसिक, कॉल/लोकेशन रिकॉर्ड्स, सीसीटीवी, आत्मा-गवाह इत्यादि) मिलें तो वही अदालत/सीबीआई आदि के समक्ष प्रभावशाली होंगे। केवल अनुभवी बयानों पर कोर्ट में मामला मजबूत नहीं बनता। परिवार ने क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ कानूनी कदम उठाने का संकेत दिया है — यह उनका संवैधानिक अधिकार है।
  5. नैतिक और भावनात्मक परिप्रेक्ष्य
    • सार्वजनिक रूप से चलने वाली अटकलें पीड़ित परिवार और अन्य व्यक्तियों के लिए भावनात्मक बोझ बढ़ा सकती हैं। साथ ही, मीडिया-अभिगम में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी जरूरी है — बिना पुष्टि खबर फैलने पर समाज में गलतफहमी और व्यक्तियों की छवि प्रभावित हो सकती है।

श्वेता सिंह कीर्ति के ताज़ा दावे ने मामला फिर गरम कर दिया है; हालांकि ये दावे भावनात्मक और संदेहजनक हैं, न्यायिक रूप से असरदार बनाने के लिए ठोस, सत्यापनीय सबूतों की ज़रूरत होगी। सार्वजनिक बहस की वैधता है, पर जांच और खबरनगरी दोनों में वैज्ञानिक प्रमाण और जिम्मेदार प्रणाली—दोनों का सम्मान आवश्यक है।

Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

Leave a Comment