चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले की बाईपास सड़क पर बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ग्रामीणों और आदिवासी संगठनों द्वारा शांतिपूर्ण आंदोलन किया जा रहा था। लेकिन प्रशासन ने रात के अंधेरे में आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे, जिससे कई लोग घायल हुए।
स्थानीय पुलिस ने 74 लोगों के खिलाफ नामजद और 500 से अधिक लोगों पर अज्ञात मामले दर्ज किए, जबकि 16 से अधिक निर्दोष ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया। यह घटना झारखंड बनने के बाद आदिवासी समाज पर हुई सबसे गंभीर पुलिस कार्रवाई के रूप में देखी जा रही है।
भाजपा और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया:
झारखंड मुक्ति मोर्चा सरकार और प्रशासन की इस दमनात्मक कार्रवाई के खिलाफ भाजपा और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने झारखंड बंद का आह्वान किया, जिसे जनता का व्यापक समर्थन मिला। बंद की सफलता से घबराकर सत्तारूढ़ दल ने पोस्ट ऑफिस चौक पर भाजपा नेताओं का पुतला दहन कर जनता की आवाज दबाने का प्रयास किया।
सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि जब उपायुक्त से मिलकर ज्ञापन देने गए, तो प्रशासन का व्यवहार भेदभावपूर्ण और असहनीय रहा, जो लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत बताया जा रहा है।
आदिवासी समाज की अनदेखी
अत्यंत विडंबनापूर्ण बात यह है कि इस जिले के सांसद, सभी विधायक, मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री स्वयं आदिवासी समाज से होने के बावजूद आदिवासियों की जायज़ मांगों की अनदेखी की जा रही है। प्रशासन ने उनके शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक दबाया, जो सत्ता के अहंकार और जनभावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा का बयान
पूर्व मुख्यमंत्री श्री मधु कोड़ा ने कहा:
“ग्रामीणों की मांग पूरी तरह उचित है। सरकार को पहले जनता की बात सुननी चाहिए थी, लाठी नहीं चलानी चाहिए थी। निर्दोष ग्रामीणों की रिहाई, घायलों का इलाज और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।”













