चाईबासा, 26 अक्टूबर 2025 | द न्यूज़ फ्रेम
चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को संक्रमित खून चढ़ाए जाने का मामला अब बेहद गंभीर रूप ले चुका है। शनिवार को जांच के दौरान चार और बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही संक्रमित बच्चों की कुल संख्या 5 तक पहुंच गई है।
स्वास्थ्य विभाग में इस खुलासे से हड़कंप मच गया है। रांची से एक विशेष जांच टीम शनिवार को चाईबासा पहुंची और अस्पताल की पूरी कार्यप्रणाली की जांच शुरू कर दी। टीम ने बताया कि पिछले एक सप्ताह के भीतर सदर अस्पताल के एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर में 5 बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। ये सभी बच्चे थैलेसीमिया के मरीज हैं और हाल ही में इसी अस्पताल के ब्लड बैंक से खून चढ़ाया गया था।
अस्पताल में मचा हंगामा, मरीजों में भय और आक्रोश
इस घटना के बाद अस्पताल में मरीजों और परिजनों के बीच भय और आक्रोश का माहौल है। कई परिजन अब सदर अस्पताल में ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराने से बच रहे हैं।
शिकायत से खुला मामला
यह मामला तब सामने आया जब चाईबासा के एक 7 वर्षीय थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के पिता ने शुक्रवार को पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त (डीसी) से शिकायत की। उन्होंने बताया कि 13 सितंबर को बच्चे को सदर अस्पताल में खून चढ़ाया गया था, और 18 अक्टूबर को जांच में बच्चा एचआईवी पॉजिटिव पाया गया।
माता-पिता ने खुद की जांच भी कराई, जिसमें दोनों एचआईवी नेगेटिव पाए गए। इसके बाद डीसी ने तुरंत जांच के आदेश दिए, और झारखंड हाईकोर्ट ने भी स्वत: संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग को विस्तृत जांच का निर्देश दिया।
स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय
टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि संक्रमित खून कहां से आया और ब्लड स्क्रीनिंग प्रक्रिया में लापरवाही कैसे हुई। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रशासन से ब्लड बैंक का पूरा रिकॉर्ड मांगा है।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
जिले के स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा है कि “दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा” और ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की जाएगी।
बड़ा सवाल:
यह घटना सरकारी अस्पतालों में ब्लड सेफ्टी सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर करती है। सवाल यह है कि आखिर जांच के नाम पर चल रही प्रक्रियाएं सिर्फ कागज़ी क्यों रह जाती हैं?
🩸 “संवेदनशील बच्चों की जिंदगी से हुआ यह खिलवाड़, सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरी चोट है।”
— रिपोर्ट: द न्यूज़ फ्रेम













