कविता : यह कविता भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने और दीपावली के पावन उत्सव से जुड़ी है। जिसे करुणामय मंडल
पूर्व जिला पार्षद,पोटका पूर्वी सिंहभूम, झारखंड ने रचा है। इस कविता में कवि करुणामय मंडल ने बताया है कि जब रावण वध कर प्रभु राम, लक्ष्मण और सीता अयोध्या लौटे, तब समूचा नगर दीपों से जगमगा उठा — यही दिन दीपावली कहलाया। उसी समय मां दुर्गा की पूजा और मां काली की आराधना का भी विशेष महत्व बताया गया है।
कवि ने यह भी कामना की है कि प्रभु राम और मां काली की कृपा से हर घर में सुख, शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य का वास हो। दीपावली न केवल प्रकाश का पर्व है, बल्कि अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक भी है।

कविता पढ़ें –
“इंतजार है सब को
आयेंगे प्रभु राम।
साथ में लक्ष्मण सीता
लौटेंगे निज धाम।।
शरत में अकाल बोधन
किए मां दशभुजा।
रावण वध सीता उद्धार
कर कर दुर्गा पूजा।।
लंका से अयोध्या लौटे
तीनों गुणों धाम।
हर्षित हुए अयोध्या वासी
हुए पूर्ण मनोकाम।।
उस रोज थी अमावस रात
घन घोर अंधकार।
स्वागत में दीप घर घर जले
हुआ जगत उजियार।।
कार्तिक की अमावस थी
पूजा मां काली की।
प्रभु राम के आगमन जश्न
मनाए दीपावली की।।
युगों पुरानी परंपरा है ये
पूर्वजों की पुण्य गाथा।
विजयश्री “राम” के संग
घर लौटी लक्ष्मी “सीता”।।
“लक्ष्मण” सा शुभ लक्षण
दिखे सबका घर ।
सुख शांति स्वस्थ्य समृद्धि
वृद्धि हो निरंतर।।
मां काली की परम कृपा
खुशहाल करे जीवन।
घर घर में आज लौट आए
श्रीराम-सीता-लक्ष्मण।।”
भाव सार:
“दीपावली राम की विजय और सीता-लक्ष्मण के संग अयोध्या वापसी का उत्सव है,
जो हर मन में उजाला, प्रेम और मंगल की भावना जगाता है।”













