जमशेदपुर। भारत रत्न, मिसाइल मैन और देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर ऑल इंडिया आइडियल टीचर्स एसोसिएशन (AITA) और एम.एस. आई.टी.आई. की संयुक्त बैठक जवाहर नगर में आयोजित की गई।
कार्यक्रम में शिक्षाविदों, पत्रकारों और समाजसेवियों ने भाग लेकर डॉ. कलाम के आदर्शों, सादगी, और शिक्षा के प्रति उनके दृष्टिकोण पर विचार साझा किए।
शिक्षा ही राष्ट्र निर्माण की कुंजी है
कार्यक्रम की शुरुआत मोहम्मद याहया साहब द्वारा तिलावत-ए-कुरआन पाक से हुई।
इसके पश्चात प्रोफेसर जावेद अख्तर अंसारी (पूर्व आईटा झारखंड अध्यक्ष) ने स्वागत भाषण में डॉ. कलाम की जीवन यात्रा और उनके वैज्ञानिक योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “डॉ. कलाम का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची लगन, मेहनत और ईमानदारी से कोई भी व्यक्ति असंभव को संभव बना सकता है।”
सादगी और प्रेरणा के प्रतीक — डॉ. कलाम
वरिष्ठ पत्रकार शाकिर अज़ीमाबादी ने डॉ. कलाम को सादगी, अनुशासन और समर्पण की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिक्षकों और युवाओं को कलाम साहब के बताए रास्ते पर चलने की सबसे अधिक आवश्यकता है।
खुर्शीद इकराम अंसारी (स्टेट एडवाइजरी काउंसिल मेंबर) ने उनके संघर्षों और जीवन के प्रेरक प्रसंगों को याद करते हुए कहा कि “कलाम साहब ने हमें सिखाया कि ज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज के काम आए।”
शिक्षा के साथ संस्कार और कौशल जरूरी
एम.एस. आई.टी.आई. के डायरेक्टर एवं सेंट्रल सेक्रेटरी खालिद इकबाल साहब ने अपने “वोट ऑफ थैंक्स” में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा —
“जो लोग अपने पूर्वजों को याद रखते हैं, इतिहास उन्हें कभी भुला नहीं सकता।”
उन्होंने कलाम साहब के कथन का हवाला देते हुए कहा —
“ज्ञान को बांटना चाहिए, इसे सीमित नहीं रखना चाहिए।”
खालिद इकबाल ने शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और नैतिकता पर बल देते हुए कहा कि आज के समय में कौशल (Skill) और रोज़गारपरक प्रशिक्षण समाज के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य
इस अवसर पर मेहरुनिसा रूमी, अब्दुर्रहमान, बसरा इब्राहिम, नूरजहां, सबा परवीन, मन्तशा आलिया, फ़ैयाज़ अहमद, आसिफ़ इकबाल समेत कई आईटा सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर डॉ. कलाम के सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
📍 रिपोर्ट: विशेष संवाददाता, जमशेदपुर
📞 संपर्क: खालिद इकबाल – 9308652107








