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खांसी-सर्दी के सिरप पर सख्त कार्रवाई: दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अब नहीं मिलेगी खांसी की दवा

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On: October 8, 2025 8:26 PM
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दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नहीं दे खांसी-सर्दी का सिरप, सरकार ने लगाया बैन
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  • मध्य प्रदेश और राजस्थान में सिरप से बच्चों की मौत के बाद केंद्र की एडवाइजरी पर राज्य सरकार का बड़ा कदम

Cough Syrup Advisory: मध्य प्रदेश और राजस्थान में खांसी की सिरप से बच्चों की मौत के बाद केंद्र सरकार ने चेतावनी जारी की थी। इसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य में दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार की खांसी या सर्दी-जुकाम की सिरप देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

यह आदेश केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एडवाइजरी के बाद सोमवार को जारी किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कोई भी डॉक्टर या स्वास्थ्य संस्थान इस गाइडलाइन का उल्लंघन न करे।

मध्य प्रदेश में 11 बच्चों की मौत के बाद सतर्क हुई सरकार

छिंदवाड़ा जिले में खांसी की सिरप पीने से कई बच्चों की किडनी फेल हो गई थी, जिनमें से अब तक 11 बच्चों की मौत हो चुकी है। जांच में सिरप में जहरीला केमिकल पाया गया था, जिसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने तत्काल इसकी बिक्री पर रोक लगा दी थी।
इसी तरह बैतूल और राजस्थान में भी बच्चों की तबीयत बिगड़ने की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर दी, जिसके तहत अब छत्तीसगढ़ ने सख्त कार्रवाई की है।

दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सिरप पर पूर्ण बैन

राज्य स्वास्थ्य विभाग के आदेश में कहा गया है कि

“दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार की खांसी-सर्दी की सिरप या सर्दी-जुकाम की दवा नहीं दी जाएगी। यह कदम बच्चों को संभावित दुष्प्रभावों से बचाने के लिए उठाया गया है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों में सामान्य खांसी-जुकाम अपने आप ठीक हो जाता है, इसलिए उन्हें दवा देना अनावश्यक और कभी-कभी खतरनाक हो सकता है।

सभी अस्पतालों और डॉक्टरों को सख्त निर्देश

स्वास्थ्य विभाग ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) और सिविल सर्जनों को आदेश जारी करते हुए कहा है कि

  • केंद्र सरकार की गाइडलाइन का सख्ती से पालन किया जाए।
  • बिना डॉक्टर की स्पष्ट सलाह के कोई भी सिरप या दवा प्रिस्क्राइब नहीं की जाएगी।
  • किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

फार्मेसियों और दवा कंपनियों पर बढ़ी निगरानी

राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) ने भी निगरानी बढ़ा दी है।

  • सभी निजी फार्मेसियों का आकस्मिक निरीक्षण किया जा रहा है।
  • औषधि निरीक्षकों के विशेष दल गठित किए गए हैं, जो निर्माण इकाइयों का Risk-Based Inspection कर रहे हैं।
  • दवा बिक्री संस्थानों में बैन दवाओं की मौजूदगी या अनुचित उपयोग मिलने पर लाइसेंस रद्द किया जाएगा।

सरकारी आपूर्ति शृंखला सुरक्षित

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) ने स्पष्ट किया है कि

“जिन दो कंपनियों के विरुद्ध अन्य राज्यों में कार्रवाई हुई है, वे हमारी सरकारी आपूर्ति सूची में कभी शामिल नहीं रही हैं और न ही सीजीएमएससी के डेटाबेस में पंजीकृत हैं।”

जनजागरण अभियान शुरू

स्वास्थ्य विभाग अब आम जनता को भी जागरूक करेगा कि

  • दो साल से कम उम्र के बच्चों को डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न दें।
  • खांसी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों में घर पर देसी उपाय और विश्राम ही पर्याप्त होते हैं।

मध्य प्रदेश, राजस्थान और अब छत्तीसगढ़ में बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए ये कदम देश में दवाओं की गुणवत्ता और डॉक्टरों की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। सरकार की यह एडवाइजरी शिशुओं की जान बचाने की दिशा में एक जरूरी और समयोचित पहल मानी जा रही है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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