खरगडीहा, जमुआ। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खरगडीहा आगमन को आज पूरे 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। 6 अक्टूबर 1925 का वह ऐतिहासिक क्षण, जब गांधीजी खरगडीहा बाज़ार पधारे थे, अब एक शताब्दी के रूप में यादगार बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसी उद्देश्य से खरगडीहा बेसिक स्कूल प्रांगण में शनिवार को एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता श्री सुन्दर राम ने की।
बैठक में जमुआ प्रखंड के समाजसेवी, बुद्धिजीवी, पत्रकार, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। इसमें तय किया गया कि गांधीजी के खरगडीहा आगमन की शताब्दी को भव्य तरीके से मनाया जाएगा।
कार्यक्रमों की झलक
बैठक में जो प्रमुख प्रस्ताव आए, उनमें शामिल हैं:
- विचार गोष्ठी और प्रभातफेरी – गांधीजी के विचारों और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम – स्थानीय कलाकारों द्वारा गांधीजी के जीवन और आदर्शों पर आधारित प्रस्तुति।
- विशेष प्रदर्शनी – गांधीजी के संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े दुर्लभ क्षणों को दर्शाती प्रदर्शनी।
- गांधी प्रतिमा की स्थापना – मो. मुख्तार शेख (खरगडीहा ऊपर टोला निवासी) ने प्रतिमा निर्माण का पूरा खर्च वहन करने की घोषणा की।
- मेला और विद्यालय उन्नयन – कार्यक्रम स्थल पर मेले का आयोजन और राजकीय बुनियादी विद्यालय को उच्च विद्यालय में अपग्रेड कराने की पहल।

गांधीजी की प्रेरणा
वक्ताओं ने कहा कि गांधीजी का खरगडीहा आगमन केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी शिक्षाएँ आज भी सामाजिक एकता, अहिंसा और स्वराज की दिशा में मार्गदर्शन करती हैं।
प्रमुख उपस्थिति
बैठक में प्रो. शमीम, अनिल चौधरी, मो. कौसर, विजय चौरसिया, मो. जुल्फिकार अली, सच्चिदानंद सिंह, अमित सिंह, रोहित दास, आलम अंसारी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इसके अलावा प्रफुल्ल सिंह, इरफान आलम, आलोक चौधरी, आशीष भदानी, चंदन प्रसाद, सुरेश भदानी, मनीष भदानी, ब्रजकिशोर शर्मा, मो. नूर, दिवस कुमार, जीवलाल, ज्योतींद्र प्रसाद, रविन्द्र साव, सत्यनारायण प्रसाद, मनीष साव, राहुल साव, सुन्दर राम भदानी, रोहित साव, मन्नूवर हसन बंटी, देवेंद्र कुमार गुप्ता और सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
आगे की योजना
बैठक में तय किया गया कि आने वाले दिनों में विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाएगी, ताकि अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित की जा सके और गांधीजी की शताब्दी को ऐतिहासिक रूप से मनाया जा सके।
गांधीजी की शताब्दी पर खरगडीहा तैयार है अपनी विरासत को नए रूप में जीवंत करने के लिए।








