जादूगोड़ा, पोटका: जन्म से दिव्यांग मोती राम की दैनिक जद्दोजहद, जादूगोड़ा थाना अंतर्गत ईंटभट्टा निवासी मोती राम, उम्र लगभग 40 वर्ष, जन्म से ही पोलियो के शिकार हैं। उनके दोनों पाँव बेहद छोटे हैं, जिसके कारण उन्हें मेंढ़क की तरह फुदकते हुए हाथों के सहारे चलना पड़ता है।
हालांकि सरकार की ओर से उन्हें एक हैंड ट्राईसाइकिल दी गई है, पर हाथों में भी कमजोरी के कारण वह उसका प्रयोग करने में असमर्थ हैं। उनके साथ उनकी बेटी को रोजमर्रा की आवाजाही में काफ़ी कठिनाई उठानी पड़ती है।
बैटरी चालित साइकिल के लिए की थी कई बार गुहार
मोती राम ने पंचायत से लेकर प्रखंड, दाता से लेकर नेता तक कई बार बैटरी सिस्टम वाले साइकिल की माँग की, परंतु अब तक किसी स्तर पर उन्हें मदद नहीं मिली।

करुणामय मंडल ने सुनी पीड़ा, किया त्वरित संपर्क
इस कठिन परिस्थिति की सूचना मिलने पर पोटका के पूर्व जिला पार्षद करुणामय मंडल स्वयं मोती राम के पंचर दुकान पहुँचे और उनके दुख-दर्द को जाना।
उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची स्थित भारत सरकार की दिव्यांगजन सहायता संस्था से तत्काल संपर्क किया और मोती राम के 90% दिव्यांगता प्रमाण पत्र समेत सभी जरूरी दस्तावेज व्हाट्सएप के माध्यम से विभाग को भेजे।
विभाग ने दिया सकारात्मक आश्वासन
संस्था की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया मिली और यह आश्वासन दिया गया कि मोती राम के लिए शीघ्र बैटरी चालित साइकिल की व्यवस्था की जाएगी।
इस मौके पर समाजसेवी हेमंत बेहरा भी करुणामय मंडल के साथ मौजूद रहे।
विशेष बिंदु:
- 90% दिव्यांगता के बावजूद सरकार की योजनाओं से वंचित रहे मोती राम
- स्थानीय स्तर पर उपेक्षा का शिकार
- एक सक्रिय जनप्रतिनिधि की पहल से उम्मीद की किरण
- दिव्यांगों के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन में ज़मीनी स्तर पर सुधार की आवश्यकता
मोती राम की व्यथा सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सैकड़ों दिव्यांगजनों की सामूहिक पीड़ा है जो आज भी व्यवस्था की उपेक्षा झेल रहे हैं। करुणामय मंडल की तत्परता ने यह साबित कर दिया कि इच्छाशक्ति हो तो समाधान संभव है। अब देखना होगा कि सरकारी विभाग इस आश्वासन को कब ज़मीन पर उतारता है।








