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शिक्षा

मुरली पैरामेडिकल कॉलेज जमशेदपुर के विद्यार्थियों का 100 प्रतिशत रिजल्ट

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जमशेदपुर : मुरली पैरामेडिकल एंड रिसर्च कॉलेज ने एक बार फिर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता को साबित किया है। कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. नूतन रानी ने यह बताया कि मुरली पैरामेडिकल एंड रिसर्च कॉलेज के ड्रेसर के सत्र (2023-24), डी.एम.एल.टी. के सत्र (2022-24) एवं ओ.टी. के सत्र (2022-24) के छात्रों का शत-प्रतिशत रिजल्ट हुआ है।

रिजल्ट प्रकाशित होने के बाद कॉलेज में हर्ष और उल्लास का माहौल देखा गया। सभी छात्र अपने उज्ज्वल भविष्य को लेकर उत्साहित एवं आशान्वित नजर आए। कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. शालिनी ने इस सफलता का श्रेय शिक्षकों और छात्रों की मेहनत एवं समर्पण को दिया। उन्होंने कहा कि कॉलेज के शिक्षकों, डॉ. चंदन पांडा, मेघवाल साव, डॉ. निशांत, डॉ. अपूर्व विक्रम और श्री सेवल दे के सहयोग से छात्रों ने यह शानदार उपलब्धि हासिल की है।

कॉलेज के शिक्षकों ने भी अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता छात्रों की मेहनत और संस्थान की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रणाली का परिणाम है। मुरली पैरामेडिकल एंड रिसर्च कॉलेज छात्रों को उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान करने के लिए हर संभव प्रयास करता है। कॉलेज में अध्ययन सामग्री, पुस्तकालय, प्रायोगिक परीक्षाएं, जांच परीक्षाएं और मौखिक परीक्षाओं का उचित प्रबंध किया जाता है।

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विशेष रूप से, कॉलेज के प्रायोगिक प्रशिक्षण में अनुमंडल अस्पताल घाटशिला का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिससे छात्र व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके।

कॉलेज प्रशासन ने सभी विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए इस प्रतिष्ठित संस्थान में नामांकन कराएं और समाज के लिए कुशल स्वास्थ्य सेवक बनने में योगदान दें।

नामांकन हेतु संपर्क करें: शशि कला – 7488 983 401 नमिता – 8797 172442

इसके अतिरिक्त, इस संस्थान को झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से भी मान्यता प्राप्त है, जिसके तहत छात्र बी.ए., बी.कॉम, एम.कॉम, बी.बी.ए., एवं बी.सी.ए. की पढ़ाई कम शुल्क में कर सकते हैं। कॉलेज का शांत वातावरण एवं शिक्षकों की सहयोगात्मक प्रवृत्ति छात्रों के समग्र विकास में सहायक सिद्ध होती है।

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झारखंड

निजी स्कूलों में आदेश की अवहेलना कर किताबों की बिक्री, अभिभावक संघ ने की कार्रवाई की मांग

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जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिला के कई निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा विभाग के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करते हुए स्कूल परिसर में किताबों की बिक्री जारी रखने का मामला सामने आया है। इस पर नाराजगी जताते हुए जमशेदपुर अभिभावक संघ ने उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को पत्र सौंपकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

अध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया है कि झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 की धारा 7(अ)(3) के अनुसार स्कूल परिसर का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। इसके तहत स्कूल किसी भी प्रकार के व्यापारिक गतिविधि, जैसे किताबें, यूनिफॉर्म या जूते आदि की बिक्री के लिए अभिभावकों या छात्रों को बाध्य नहीं कर सकता।

जारी हैं व्यवसायिक गतिविधियाँ, आदेश की हो रही अनदेखी

अभिभावक संघ ने दावा किया है कि despite विभागीय आदेशों के बावजूद, जमशेदपुर के कुछ प्रतिष्ठित निजी स्कूल – जैसे सेंट मैरी स्कूल बिस्टुपुर, चिन्मया स्कूल बिस्टुपुर और जुस्को स्कूल बिस्टुपुर, अपने परिसरों में किताबों की बिक्री कर रहे हैं। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव भी डालता है।

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पिछले आदेशों की भी हो रही अनदेखी

ज्ञात हो कि जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा पूर्व में भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि:

  • स्कूल परिसर का उपयोग केवल शिक्षण कार्यों के लिए किया जाए।
  • स्कूल किसी भी विशेष विक्रेता से सामग्री खरीदने के लिए छात्रों को बाध्य न करें।
  • किसी भी परिस्थिति में परिसर में किताब या अन्य शैक्षणिक सामग्री की बिक्री न हो।

अभिभावक संघ का कहना है कि इन आदेशों के बावजूद कई स्कूल खुलेआम इन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, जो न केवल गैरकानूनी है बल्कि नैतिक रूप से भी अनुचित है।

कार्रवाई की मांग

डॉ. उमेश कुमार ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि ऐसे सभी स्कूलों पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप न्यायसंगत कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी संस्था शिक्षा के नाम पर व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा न दे सके।

संघ ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई है और चेताया है कि यदि इस पर जल्द कदम नहीं उठाया गया, तो अभिभावकों द्वारा जन आंदोलन भी शुरू किया जा सकता है।

वीडियो देखें : 

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शिक्षा

एनआईटी जमशेदपुर में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद सत्र आयोजित

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जमशेदपुर : राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर में गुरुवार को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन किया गया। यह सत्र जीवन आत्महत्या निवारण केंद्र, जमशेदपुर के सहयोग से आयोजित हुआ, जो मानसिक तनाव, अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति से जूझ रहे लोगों के लिए वर्षों से परामर्श सेवाएं दे रहा है।

कार्यक्रम का उद्देश्य था – छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य की गंभीरता से अवगत कराना, तनाव और अवसाद के शुरुआती लक्षणों को पहचानने की जानकारी देना, और आत्महत्या जैसे खतरनाक कदम से बचाव हेतु आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना।

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केंद्र के विशेषज्ञों ने दिया जीवन से जुड़ने का संदेश

कार्यक्रम में जीवन केंद्र के ट्रस्टी श्री दीपक डोकनीय, संयुक्त निदेशक गुरप्रीत कौर भाटिया, और सुचिता त्रेहान ने छात्रों को यह संदेश दिया कि “आत्महत्या कोई समाधान नहीं, बल्कि हर समस्या का हल संभव है, बस समय रहते मदद लें।” उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्व देना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अचिंतों बनर्जी और राजीव रंजन ने छात्रों को तनाव और अवसाद के लक्षण जैसे – नींद में अनियमितता, सामाजिक अलगाव, निराशा, आत्मग्लानि और रुचियों में कमी की पहचान करना सिखाया और पेशेवर मदद लेने के लिए प्रेरित किया।

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निदेशक बोले – यह संवाद आत्मचिंतन और साहस का माध्यम है

संस्थान के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधर ने संवाद सत्र को छात्रों के लिए बेहद उपयोगी बताया। उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम सिर्फ जागरूकता नहीं, बल्कि छात्रों को आत्मचिंतन, स्वीकार्यता और मानसिक समर्थन की दिशा में एक मजबूत कदम है। संस्थान भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करेगा।”

संवाद में छात्रों ने खुलकर हिस्सा लिया, कई ने अपने अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से प्रश्न पूछे। इससे स्पष्ट हुआ कि छात्रों को ऐसे मंचों की आवश्यकता है जहां वे खुलकर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकें।

कुलसचिव ने की पहल की सराहना

कुलसचिव कर्नल (डॉ) निशीथ कुमार राय ने कहा कि तकनीकी शिक्षा के दबाव में छात्र अक्सर मानसिक तनाव में आ जाते हैं। ऐसे संवाद उनके लिए संबल और समाधान का कार्य करते हैं।

कार्यक्रम में उप निदेशक प्रो. राम विनय शर्मा, डीन स्टुडेंट्स प्रो. राकेश प्रताप सिंह, डीन एकेडमिक प्रो. मधुसूदन राव, मुख्य छात्रावास अधीक्षक डॉ. लालजी प्रसाद, मीडिया प्रभारी सुनील कुमार भगत सहित सभी छात्रावास अधीक्षक, संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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24×7 सहायता उपलब्ध

कार्यक्रम के अंत में जीवन केंद्र ने छात्रों को अपनी हेल्पलाइन, ईमेल और परामर्श सेवाओं की जानकारी दी, जिससे वे किसी भी समय मदद प्राप्त कर सकें।

कार्यक्रम एक सकारात्मक और भावनात्मक वातावरण में संपन्न हुआ, जिसने छात्रों को यह विश्वास दिलाया – “आप अकेले नहीं हैं।”

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शिक्षा

03-18 आयु वर्ग के बच्चों का अनिवार्य शिक्षा को लेकर मुखियागण का किया गया उन्मुखीकरण

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  • जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त के निर्देशानुसार टाउन हॉल में आयोजित हुआ जिला स्तरीय मुखिया सम्मेलन
  • 03-18 आयु वर्ग के बच्चों का अनिवार्य शिक्षा को लेकर मुखियागण का किया गया उन्मुखीकरण, जिला परिषद अध्यक्ष, उप विकास आयुक्त, जिला परिषद सदस्यगण, मुखियागण हुए शामिल

जमशेदपुर : नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, समग्र शिक्षा एवं नई शिक्षा नीति पंचायत प्रतिनिधि/ स्थानीय प्राधिकार को महत्पूर्ण कार्य दिए गए हैं। स्थानीय प्राधिकार को 03-18 आयु वर्ग के सभी बच्चों का शिशु पंजी अद्यतीकरण, नामांकन, ठहराव एवं 12वीं कक्षा तक शिक्षा पूर्ण कराने की जिम्मेदारी दिया गया है।

इस जिम्मेवारी से अवगत कराने एवं अपेक्षित सहयोग हेतु शिक्षा विभाग द्वारा जिला स्तरीय मुखिया सम्मेलन का आयोजन टाउन हॉल सिदगोड़ा में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती बारी मुर्मू, उप विकास आयुक्त श्री अनिकेत सचान, जिला परिषद सदस्यगण तथा जिला अंतर्गत सभी पंचायतों के मुखिया शामिल हुए, डीईओ श्री मनोज कुमार, डीएसई श्री आशीष पांडेय तथा शिक्षा विभाग के अन्य पदाधिकारी, कर्मी इस अवसर पर मौजूद रहे।

जिला परिषद अध्यक्ष ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पंचायत क्षेत्र के संपूर्ण विकास में मुखियागण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विकास कार्यों का क्रियान्वयन हो या शिक्षा, स्वास्थ्य या अन्य जनोपयोगी कार्य तथा सरकारी संस्थाओं से आमजनों को मिलने वाली सेवायें और सुविधायें, इन सभी का सतत पर्यवेक्षण कर अपना योगदान दें। शिक्षा के क्षेत्र में भी कार्य करने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

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पंचायत जनप्रतिनिधि आमजनों के लिए सुलभ भी होते हैं ऐसे में जरूरी है कि अपने पंचायत में शिक्षा की स्थिति पर निगरानी रखें, स्कूल समय पर खुले, बच्चे रोजाना विद्यालय जाएं, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति का सतत पर्यवेक्षण करें। उन्होने कहा कि अज्ञानता के कारण कई बार माता-पिता बच्चों को स्कूल नहीं भेजते, उन्हें भी शिक्षित करें तथा बच्चे अपनी उच्च शिक्षा पूरी करें, ड्रॉप आउट नहीं हों इस दिशा में पहल करें। बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की सलाह माता-पिता को दें, कोई निर्धन-अनाथ बच्चा हो तो उन्हें गोद लें और मदद करें ताकि उनका भविष्य सुरक्षित, संरक्षित हो।

उप विकास आयुक्त ने स्कूलों में बच्चों की नियमित उपस्थिति एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर बल देते हुए अपने पूर्व के अनुभवों को मुखियागण के साथ साझा किया। उन्होने उदाहरण देकर बताया कि कैसे एक पंचायत के मुखिया ने अपने नेतृत्व में पूरे पंचायत का परिवेश बदल दिया। पंचायतों में बने ज्ञान केन्द्र को तकनीक से जोड़कर बच्चों में शिक्षा के प्रति रूचि जगाने तथा माता-पिता को भी शिक्षा की महत्ता के प्रति जागरूक करने की अपील किया। उन्होने कहा कि विकास कार्य की तरह शिक्षा का क्षेत्र भी अछूता नहीं रहे आपके प्रयासों से, सामूहिक प्रयास एक बड़े बदलाव की संभावना को प्रबल करती है। उन्होने सभी मुखियागण से अपने पंचायत क्षेत्र के विद्यालयों का सतत निरीक्षण, अनुश्रवण करने की अपील कि जिससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य बेहतर हो सके तथा उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

कार्यक्रम को जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला शिक्षा अधीक्षक ने भी संबोधित किया तथा बच्चों का ड्रॉप आउट रोकने, नियमित स्कूल भेज जाने, शिक्षकों की उपस्थिति, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता आदि का सतत पर्यवेक्षण कर सहयोग करने की बात कही जिससे एक बेहतर वातावरण सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दी जा सके।

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