Connect with us

झारखंड

भाजपा जमशेदपुर के महानगर अध्यक्ष ने दबंगई दिखाकर पेयजल परियोजना का कार्य रोकवा दिया – जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय

Published

on

THE NEWS FRAME

जमशेदपुर  |  झारखण्ड 

जमशेदपुर के सबसे पिछड़े इलाकों के करीब 10 हजार लोगों के लिए आरंभ की गई पेयजल परियोजना का कार्य भाजपा जमशेदपुर के महानगर अध्यक्ष ने दबंगई दिखाकर कार्य रोकवा दिया। मेरी डेढ़ साल की कड़ी मेहनत और प्रयास के बाद यह योजना स्वीकृत हुई है और टाटा स्टील से भूईयांडीह, बाबूडीह, छाईबस्ती, लालभट्ठा के पिछड़े इलाकों के लोगों के लिए कंपनी ने आवश्यक निधि भी स्वीकृत कर दिया है। योजना स्थल के चाहरदिवारी  का काम भी शुरू हो गया है। परन्तु अचानक कल खबर आई कि भाजपा के जमशेदपुर जिलाध्यक्ष ने योजना स्थल पर जाकर काम कर रहे मजदूरों के साथ मारपीट किया और उन्हें वहाँ से भगा दिया।

विदित हो कि जिस भूखंड पर इस पेयजल परियोजना के लिए आवश्यक संयंत्रों को स्थापित करने का काम शुरू हुआ वहां पर एक तरफ पूजा स्थल है और बाकी मैदान है। उक्त मैदान में ट्रकों, टेªलरों के मालिक अपना वाहन खड़ा करते है और कुछ लोग उनसे पार्किंग स्थल उपलब्ध कराने के एवज में पैसे की वसूली करते है। जहाँ तक पूजा स्थल की बात है तो टाटा स्टील के अधिकारियों ने भी कहा है कि वहाँ के निवासी जो स्थान चाहते है, वह स्थान पूजा स्थल के लिए छोड़ दिया जायेगा। इस पर पूजा समिति के लोग भी सहमत है। परन्तु जिन लोगों का निहित स्वार्थ वहां पार्किंग किये जाने वाले भारी वाहनों से वसूली करने में है, उनके स्वार्थ पर पंहुचनेवाली चोट के पक्ष में खड़े होकर काम रोकवा देना भाजपा की कार्य-संस्कृति के अनुकूल कैसे हो गयी, उसका जवाब जनता चाहती है।

अभी योजना पर काम शुरू हुआ है। एक वर्ष के भीतर पानी साफ करने का संयंत्र यहाँ खड़ा हो जायेगा और वहाँ से घरों तक पेयजल पंहुचने का काम पूरा हो जायेगा। परन्तु ऐसा लगता है कि जो लोग पिछले 25 वर्षों से ऐसे पिछड़े इलाकों में पीने का पानी तक नहीं दे पाये हैं, उनके लिए यह परियोजना स्वीकृत हो जाना, निधि का आवंटन हो जाना और त्वरित गति से काम शुरू हो जाना सदमे जैसा है, उन्हें ये पच नहीं रहा है। इसलिए वे चाहते है कि इस योजना के क्रियान्वयन में विलंब हो। अभी गर्मी का मौसम है और जिन क्षेत्रों में पानी नहीं है, वहां हमलोग टैंकरों से पानी की व्यवस्था करवा रहे है। इस समय पीने के पानी की कठिनाई आसानी से समझा जा सकती है। परंतु जो लोग निहित स्वार्थी तत्वों के पक्ष में है, उनको जनता की इस कठिनाई से लगता है कि कोई लेना-देना नहीं है।

जमशेदपुर महानगर जिला भाजपा के अध्यक्ष के बारे में कहा जाता है कि वे जमशेदपुर के निवासी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का इशारा हुए बिना खाँसते-छींकते भी नहीं है। उनके द्वारा पेयजल परियोजना का काम दबंगई दिखाकर रूकवाने के पीछे भी ऐसा संकेत हो सकता है। मैं इस बारे में भाजपा के प्रदेश स्तर के नेताओं से भी बात करूंगा और कहुंगा कि यदि जनहित के काम में अडं़गा डालना भाजपा के जिला अध्यक्ष का आचरण हो गया है तो इस बारे में हमारे जैसे लोग और जमशेदपुर की जनता क्या समझ बनायेगी, यह प्रदेश के नेताओं को स्पष्ट करना चाहिए। ऐसा लगता है कि जनहित के काम में अडंगा डालना, हिन्दु हितों के कार्यों में व्यवधान डालना भारतीय जनता पार्टी के जमशेदपुर जिला इकाई के पदाधिकारियों का मुख्य काम हो गया है।

मैं आज शाम इन बस्तियों का भ्रमण करूंगा और लोगों से वार्तालाप कर उन्हें आश्वस्त करूंगा कि जितनी जल्दी हो सके योजना का काम मैं शुरू करवांउगा। लोकतंत्र में हर तरह की समस्या का समाधान संवाद के माध्यम से करना श्रेयस्कर होता है। यदि भाजपा के जमशेदपुर महानगर जिलाध्यक्ष को कोई समस्या थी तो भले ही वे मुझसे नहीं संवाद करते, परंतु टाटा स्टील पेयजल विभाग के अधिकारियों और जिला प्रसाशन के अधिकारियों से इस विषय पर संवाद स्थापित कर ही सकते थे। परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया और सीधे योजना-स्थल पर जाकर दबंगई दिखाकर, मारपीट और ढ़ेला-पत्थर चलवाकर उन्होंने कार्यरत मजदूरों को भगा दिया और काम बन्द करा दिया। मेरे लिये यह अत्यंत घोर आश्चर्य और दुख की बात है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

झारखंड

वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद कथित सेक्युलर चेहरों से उतर गया नकाब : सुधीर कुमार पप्पू

Published

on

सुधीर कुमार पप्पू

जमशेदपुर। मोदी सरकार ने वक्फ संशोधन बिल को संसद के दोनों सदनों से पारित करवा लिया है, जिसके बाद देश की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तथाकथित सेक्युलर चेहरों की असलियत अब जनता के सामने आ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज को धोखा देने वाले नेताओं को अब आगामी चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी में असंतोष बढ़ा है और मुस्लिम नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को भी इसका नुकसान होगा। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा भाजपा को समर्थन देना भी उनके लिए महंगा साबित हो सकता है, क्योंकि मुस्लिम समुदाय अब उन्हें समर्थन नहीं देगा।

पप्पू ने आरोप लगाया कि यह विधेयक एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है जिसके जरिए मोदी सरकार वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है ताकि उन्हें पूंजीपतियों को सौंपा जा सके। उन्होंने कहा कि यह विधेयक गैर संवैधानिक है और इसकी वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। पूरे देश में इसके खिलाफ आंदोलन का माहौल बनता जा रहा है जो आने वाले समय में मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

Read more : रोटरी क्लब वेस्ट ने आयोजित किया प्रेरणादायक पर्यावरण जागरूकता सत्र, डॉ. विक्रांत तिवारी ने साझा किए अनुभव

कानूनी दृष्टिकोण से वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के पक्ष और विपक्ष में तर्क:

इस विधेयक को लेकर सरकार का तर्क है कि यह वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने का माध्यम है। विवादित संपत्तियों के निर्धारण, वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में सुधार और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए इसमें कई प्रावधान जोड़े गए हैं। साथ ही, गैर-मुस्लिम सदस्यों को बोर्ड में शामिल करने से समुदायों के बीच समरसता को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं दूसरी ओर, इसके विरोध में यह कहा जा रहा है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 14, 15 और 300A का उल्लंघन करता है। विशेष रूप से धारा 3E (Section 3E) को लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि यह प्रावधान अनुसूचित जनजातियों के उन सदस्यों को वक्फ के रूप में संपत्ति समर्पित करने के अधिकार से वंचित करता है जो इस्लाम धर्म अपना चुके हैं। अनुसूचित जातियों के विपरीत, अनुसूचित जनजातियों के सदस्य धर्म परिवर्तन के बाद भी अपनी जनजातीय पहचान नहीं खोते। ऐसे में इस्लाम अपनाने वाले जनजातीय व्यक्ति मुसलमान भी माने जाते हैं, परन्तु इस संशोधन द्वारा उन्हें अपने धर्म के एक आवश्यक अंग का पालन करने से रोका जा रहा है, जो कि अनुच्छेद 25 और 26 के तहत उनके धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

यह प्रावधान अनुच्छेद 14 और 15 का भी उल्लंघन करता है क्योंकि यह धर्म के आधार पर अनुसूचित जनजातियों के बीच और जनजातीय मुसलमानों के बीच भेदभाव करता है। इसके अतिरिक्त यह अनुच्छेद 300A के तहत संपत्ति के अधिकार को भी अप्रभावी बनाता है। इस प्रकार, यह संशोधन मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है तथा इसे रद्द किया जाना चाहिए।

निष्कर्षतः, वक्फ संशोधन विधेयक एक संवेदनशील और बहुआयामी विषय है जो धार्मिक अधिकार, अल्पसंख्यक संरक्षण और प्रशासनिक सुधार – तीनों के बीच संतुलन की मांग करता है। इसे केवल राजनीतिक चश्मे से नहीं बल्कि संविधान और न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

Continue Reading

झारखंड

रोटरी क्लब वेस्ट ने आयोजित किया प्रेरणादायक पर्यावरण जागरूकता सत्र, डॉ. विक्रांत तिवारी ने साझा किए अनुभव

Published

on

THE NEWS FRAME

जमशेदपुर : रोटरी क्लब वेस्ट जमशेदपुर द्वारा मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल के प्रेक्षागृह में एक प्रेरणादायक पर्यावरण जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे प्रख्यात पर्यावरणविद् और सामाजिक उद्यमी डॉ. विक्रांत तिवारी, जिन्होंने अपने दो दशक से अधिक के कार्य अनुभव के आधार पर युवाओं और शिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित किया।

डॉ. तिवारी का प्रेरणास्पद संदेश

आईआईएम कलकत्ता और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के पूर्व छात्र डॉ. तिवारी ने बताया कि उन्होंने अब तक 17 मिलियन से अधिक पेड़ों का रोपण करवाया है और कई एनजीओ को संसाधन जुटाने में सहायता प्रदान की है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी टीम न केवल हरित भारत की कल्पना को साकार कर रही है, बल्कि आदिवासी कला और संस्कृति को बढ़ावा देकर सतत विकास की दिशा में भी कार्य कर रही है।

डॉ. तिवारी ने छात्रों को बताया कि “पर्यावरण संरक्षण कोई विकल्प नहीं, बल्कि यह अब हमारी अनिवार्य जिम्मेदारी बन चुकी है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए हमें व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर छोटे लेकिन असरदार कदम उठाने होंगे।”

Read more : निजी स्कूलों में आदेश की अवहेलना कर किताबों की बिक्री, अभिभावक संघ ने की कार्रवाई की मांग

विद्यालय प्रबंधन की सक्रिय भागीदारी

इस कार्यक्रम की सफलता में स्कूल प्रबंधन समिति, विशेष रूप से प्राचार्या श्रीमती संगीता सिंह, उप प्राचार्या और समन्वयक शिक्षकों की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। उन्होंने छात्रों को न केवल आयोजन से जोड़ा, बल्कि पर्यावरणीय चेतना को व्यवहार में उतारने का संदेश भी दिया।

रोटरी क्लब की प्रतिबद्धता

रोटरी क्लब वेस्ट की यह पहल संगठन की स्थिरता, हरित भविष्य और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को दर्शाती है। क्लब ने इस सत्र के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि वे न केवल समाज सेवा में, बल्कि पर्यावरण संरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों पर भी जागरूकता बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

छात्रों में दिखा उत्साह

सत्र के दौरान छात्रों ने पर्यावरण से जुड़ी जिज्ञासाओं को खुलकर साझा किया और डॉ. तिवारी से मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में “प्रकृति से संवाद” विषय पर एक लघु प्रस्तुति ने सभी को भावुक और जागरूक कर दिया।

यह आयोजन न केवल एक जागरूकता अभियान था, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत भी बना, जो भावी पीढ़ी को हरित और टिकाऊ भारत के निर्माण की दिशा में सोचने और कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।

Continue Reading

झारखंड

निजी स्कूलों में आदेश की अवहेलना कर किताबों की बिक्री, अभिभावक संघ ने की कार्रवाई की मांग

Published

on

THE NEWS FRAME

जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिला के कई निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा विभाग के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करते हुए स्कूल परिसर में किताबों की बिक्री जारी रखने का मामला सामने आया है। इस पर नाराजगी जताते हुए जमशेदपुर अभिभावक संघ ने उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को पत्र सौंपकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

अध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया है कि झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 की धारा 7(अ)(3) के अनुसार स्कूल परिसर का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। इसके तहत स्कूल किसी भी प्रकार के व्यापारिक गतिविधि, जैसे किताबें, यूनिफॉर्म या जूते आदि की बिक्री के लिए अभिभावकों या छात्रों को बाध्य नहीं कर सकता।

जारी हैं व्यवसायिक गतिविधियाँ, आदेश की हो रही अनदेखी

अभिभावक संघ ने दावा किया है कि despite विभागीय आदेशों के बावजूद, जमशेदपुर के कुछ प्रतिष्ठित निजी स्कूल – जैसे सेंट मैरी स्कूल बिस्टुपुर, चिन्मया स्कूल बिस्टुपुर और जुस्को स्कूल बिस्टुपुर, अपने परिसरों में किताबों की बिक्री कर रहे हैं। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव भी डालता है।

THE NEWS FRAME

Read more : एनआईटी जमशेदपुर में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद सत्र आयोजित

पिछले आदेशों की भी हो रही अनदेखी

ज्ञात हो कि जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा पूर्व में भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि:

  • स्कूल परिसर का उपयोग केवल शिक्षण कार्यों के लिए किया जाए।
  • स्कूल किसी भी विशेष विक्रेता से सामग्री खरीदने के लिए छात्रों को बाध्य न करें।
  • किसी भी परिस्थिति में परिसर में किताब या अन्य शैक्षणिक सामग्री की बिक्री न हो।

अभिभावक संघ का कहना है कि इन आदेशों के बावजूद कई स्कूल खुलेआम इन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, जो न केवल गैरकानूनी है बल्कि नैतिक रूप से भी अनुचित है।

कार्रवाई की मांग

डॉ. उमेश कुमार ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि ऐसे सभी स्कूलों पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप न्यायसंगत कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी संस्था शिक्षा के नाम पर व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा न दे सके।

संघ ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई है और चेताया है कि यदि इस पर जल्द कदम नहीं उठाया गया, तो अभिभावकों द्वारा जन आंदोलन भी शुरू किया जा सकता है।

वीडियो देखें : 

Continue Reading

Trending

Copyright © 2017 Zox News Theme. Theme by MVP Themes, powered by WordPress.