झारखंड
आदिवासी, दलितों , पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और बौद्धिक रूप से मजबूत बनाना है। सभी विद्यालयों की होगी ग्रेडिंग, अव्वल रहने वाले विद्यालयों को किया जाएगा पुरस्कृत, मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने माध्यमिक विद्यालयों के लिए नवनियुक्त स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों को सौंपा नियुक्ति पत्र।
टाना भगत इनडोर स्टेडियम, खेलगांव, रांची, झारखण्ड
मुख्य बिंदु :
◆ मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त शिक्षकों से कहा – स्थानीय भाषा को जरूर सीखें और बच्चों के साथ उसी भाषा में संवाद करें
● बच्चों के भविष्य संवारने के साथ राज्य और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की अहम भूमिका
● बेहतर और गुणवत्ता युक्त शिक्षा के साथ शैक्षणिक गतिविधियों को दिया जा रहा बढ़ावा
● विद्यार्थियों को प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी से लेकर विभिन्न कोर्सेज के लिए दी जा रही आर्थिक सहायता
● उत्कृष्ट विद्यालय सशक्त होने के साथ नई उंचाईयां हासिल करेंगी
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के हाथों जब 3469 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिला तो उनके चेहरे खुशी से खिल उठे। मौका था टाना भगत इनडोर स्टेडियम, खेलगांव, रांची में माध्यमिक विद्यालयों के लिए नवनियुक्त स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों के बीच नियुक्ति पत्र वितरण का। मुख्यमंत्री ने समारोह में कहा- यह तो शुरुआत है। बहुत जल्द हजारों की संख्या में शिक्षक नियुक्त होंगे। राज्य में शिक्षा का बेहतर माहौल, गुणवत्ता युक्त शिक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इस दिशा में कई और अहम कड़ियां जुड़ने जा रही है।
यह नियुक्ति पत्र नहीं जिम्मेदारी है
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। क्योंकि इतने बड़े समूह में माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों एक साथ नियुक्ति पत्र दिया जा रहा है। लेकिन, यह नियुक्ति पत्र नहीं एक जिम्मेदारी है । बच्चों के भविष्य को संवारने का अहम कार्य आपको करना है। बच्चे हर दृष्टिकोण से मजबूत हों, इसमें आपकी अहम भूमिका होने वाली है। समाज में शिक्षक “भगवान” के समान होते हैं। ऐसे में आप अपने कार्यों का निर्वहन इस तरह करें कि वह पूरे समाज और राज्य के लिए मील का पत्थर साबित हो।
नियुक्तियों का शुरू हो चुका है सिलसिला
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर नियुक्तियों का सिलसिला शुरू हो चुका है । पिछले 3 वर्षों में जेपीएससी सिविल सर्विसेज, सहायक लोक अभियोजक, कृषि पदाधिकारी, पशु चिकित्सा पदाधिकारी, चिकित्सा पदाधिकारी, आयुष चिकित्सक और सहायक अभियंताओं समेत कई पदों पर बड़े पैमाने पर नियुक्ति हो चुकी है । इसके अलावा शिक्षकों और अन्य पदों पर भी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। यहां के नौजवानों को रोजगार देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
निजी क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर हुई है नियुक्ति
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी विभागों के साथ-साथ निजी क्षेत्रों में भी लगातार रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं । हमारी सरकार ने अब तक निजी कंपनियों में 10 हज़ार से ज्यादा युवाओं को नियोजित करने का कार्य किया है। सरकार ने इन सभी का डेटाबेस रखा है। मुझे इस बात की खुशी है कि यहां से काम करने के बाद कई नौजवान विदेशों में भी अपने कार्यों से झारखंड का मान सम्मान बना रहे हैं। इतना ही नहीं, अब निजी क्षेत्र में होने वाली नियुक्तियों में 75 प्रतिशत नियुक्ति स्थानीय को देना अनिवार्य कर दिया गया है।
क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा दे रही सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है । इस दिशा में क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षकों के पद पर भी नियुक्ति की गई है। मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त शिक्षकों से कहा कि उनकी जहां भी पोस्टिंग होती है, वहां की स्थानीय भाषा को वे जरूर सीखें और बच्चों के साथ उसी भाषा में संवाद करें। इससे बच्चों के पढ़ने और सीखने की क्षमता में काफी इजाफा होगा, जिसका फायदा बच्चे के साथ उनके अभिभावक, परिवार, समाज और राज्य को मिलेगा।
विद्यालयों की होगी ग्रेडिंग, किए जाएंगे पुरस्कृत
मुख्यमंत्री ने कहा की सरकार बेहतर कार्य करने वालों को सम्मानित करेगी। इस कड़ी में अब विद्यालयों की ग्रेडिंग की जाएगी। इस ग्रेडिंग में जो विद्यालय अव्वल होंगे, उसे सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होंने विद्यालयों में पैरंट्स- टीचर्स मीट नियमित रूप से कराने को कहा, ताकि बच्चों को लेकर उनके अभिभावकों के साथ टीचर्स का बेहतर समन्वय बन सके।
उत्कृष्ट विद्यालय नई ऊंचाइयां हासिल करेंगी
सरकारी विद्यालयों के बच्चे भी निजी स्कूलों की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा प्राप्त करें , इसी सोच के साथ सरकार ने पहले चरण में 80 उत्कृष्ट विद्यालयों की शुरुआत की है । आने वाले दिनों में 5 हज़ार विद्यालयों को उत्कृष्ट विद्यालयों का दर्जा दिया जाएगा। इन विद्यालयों में पठन-पाठन को लेकर सभी आधुनिक संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। मुझे विश्वास है कि उत्कृष्ट विद्यालय सशक्त होने के साथ नई उंचाईयां हासिल करेंगी।
बच्चों की पढ़ाई में आर्थिक तंगी नहीं बनेगी बाधा
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के बच्चों की पढ़ाई आर्थिक तंगी के कारण प्रभावित नहीं हो, इसके लिए सरकार कई कदम उठा रही है। बच्चों की स्कॉलरशिप राशि बढ़ा दी गई है । हर तरह की प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारियों के लिए भी सरकार आर्थिक मदद कर रही है। मेडिकल इंजीनियरिंग अथवा अन्य प्रोफेशनल कोर्सेज के लिए आर्थिक सहायता देने का निर्णय सरकार ने दिया है। इतना ही नहीं, विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए भी विद्यार्थियों का पूरा खर्च सरकार वाहन कर रही है। इसके अलावा गुरुजी क्रेडिट योजना के तहत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आसान ब्याज दर पर 15 लाख रुपए तक का लोन देने की योजना सरकार ने शुरू की है।
कार्यप्रणाली में बदलाव लाने पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य और राज्य वासियों के हित में हम सभी को अपने कार्य प्रणाली में बदलाव लाने की जरूरत है । विशेषकर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष कार्य करना है। इन दोनों ही क्षेत्रों में इसकी बुनियाद को इतना मजबूत करना है ताकि विपरीत से विपरीत परिस्थितियों हमें भी कोई इसे डिगा नहीं पाए। इसके अलावा यहां आदिवासी दलितों,पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को सामाजिक, आर्थिक शैक्षणिक और बौद्धिक हर रूप से मजबूत बनाना है।
राज्य को पिछड़ेपन और समस्याओं के जंजाल से निजात दिलाना है
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड अलग राज्य के लिए यहां के आदिवासियों और मूल वासियों ने लंबा संघर्ष किया। हजारों लोगों ने अपनी शहादत दी। लेकिन, अफसोस इस बात का है कि प्रचुर खनिज संसाधनों के बाद भी झारखंड देश के पिछड़े राज्यों में गिना जाता है। इतना ही नही, यह राज्य समस्याओं के जंजाल में भी जकड़ा है। ऐसे में हमारी सरकार ने झारखंड को तमाम समस्याओं से निकालकर देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने का संकल्प ले रखा है, और इस दिशा में हम तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं।
मंत्री श्री आलमगीर आलम और श्री सत्यानंद भोक्ता एवं मुख्य सचिव श्री सुखदेव सिंह ने भी समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीमती वंदना डाडेल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री विनय कुमार चौबे, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव श्री के रवि कुमार, जेईपीसी की स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्रीमती किरण कुमारी पासी, माध्यमिक शिक्षा निदेशक श्री सुनील कुमार और झारखंड एकेडमिक काउंसिल के अध्यक्ष डॉ अनिल कुमार महतो समेत कई अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
झारखंड
वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद कथित सेक्युलर चेहरों से उतर गया नकाब : सुधीर कुमार पप्पू

जमशेदपुर। मोदी सरकार ने वक्फ संशोधन बिल को संसद के दोनों सदनों से पारित करवा लिया है, जिसके बाद देश की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तथाकथित सेक्युलर चेहरों की असलियत अब जनता के सामने आ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज को धोखा देने वाले नेताओं को अब आगामी चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी में असंतोष बढ़ा है और मुस्लिम नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को भी इसका नुकसान होगा। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा भाजपा को समर्थन देना भी उनके लिए महंगा साबित हो सकता है, क्योंकि मुस्लिम समुदाय अब उन्हें समर्थन नहीं देगा।
पप्पू ने आरोप लगाया कि यह विधेयक एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है जिसके जरिए मोदी सरकार वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है ताकि उन्हें पूंजीपतियों को सौंपा जा सके। उन्होंने कहा कि यह विधेयक गैर संवैधानिक है और इसकी वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। पूरे देश में इसके खिलाफ आंदोलन का माहौल बनता जा रहा है जो आने वाले समय में मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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कानूनी दृष्टिकोण से वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के पक्ष और विपक्ष में तर्क:
इस विधेयक को लेकर सरकार का तर्क है कि यह वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने का माध्यम है। विवादित संपत्तियों के निर्धारण, वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में सुधार और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए इसमें कई प्रावधान जोड़े गए हैं। साथ ही, गैर-मुस्लिम सदस्यों को बोर्ड में शामिल करने से समुदायों के बीच समरसता को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं दूसरी ओर, इसके विरोध में यह कहा जा रहा है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 14, 15 और 300A का उल्लंघन करता है। विशेष रूप से धारा 3E (Section 3E) को लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि यह प्रावधान अनुसूचित जनजातियों के उन सदस्यों को वक्फ के रूप में संपत्ति समर्पित करने के अधिकार से वंचित करता है जो इस्लाम धर्म अपना चुके हैं। अनुसूचित जातियों के विपरीत, अनुसूचित जनजातियों के सदस्य धर्म परिवर्तन के बाद भी अपनी जनजातीय पहचान नहीं खोते। ऐसे में इस्लाम अपनाने वाले जनजातीय व्यक्ति मुसलमान भी माने जाते हैं, परन्तु इस संशोधन द्वारा उन्हें अपने धर्म के एक आवश्यक अंग का पालन करने से रोका जा रहा है, जो कि अनुच्छेद 25 और 26 के तहत उनके धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
यह प्रावधान अनुच्छेद 14 और 15 का भी उल्लंघन करता है क्योंकि यह धर्म के आधार पर अनुसूचित जनजातियों के बीच और जनजातीय मुसलमानों के बीच भेदभाव करता है। इसके अतिरिक्त यह अनुच्छेद 300A के तहत संपत्ति के अधिकार को भी अप्रभावी बनाता है। इस प्रकार, यह संशोधन मनमाना, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है तथा इसे रद्द किया जाना चाहिए।
निष्कर्षतः, वक्फ संशोधन विधेयक एक संवेदनशील और बहुआयामी विषय है जो धार्मिक अधिकार, अल्पसंख्यक संरक्षण और प्रशासनिक सुधार – तीनों के बीच संतुलन की मांग करता है। इसे केवल राजनीतिक चश्मे से नहीं बल्कि संविधान और न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।
झारखंड
रोटरी क्लब वेस्ट ने आयोजित किया प्रेरणादायक पर्यावरण जागरूकता सत्र, डॉ. विक्रांत तिवारी ने साझा किए अनुभव

जमशेदपुर : रोटरी क्लब वेस्ट जमशेदपुर द्वारा मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल के प्रेक्षागृह में एक प्रेरणादायक पर्यावरण जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे प्रख्यात पर्यावरणविद् और सामाजिक उद्यमी डॉ. विक्रांत तिवारी, जिन्होंने अपने दो दशक से अधिक के कार्य अनुभव के आधार पर युवाओं और शिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित किया।
डॉ. तिवारी का प्रेरणास्पद संदेश
आईआईएम कलकत्ता और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के पूर्व छात्र डॉ. तिवारी ने बताया कि उन्होंने अब तक 17 मिलियन से अधिक पेड़ों का रोपण करवाया है और कई एनजीओ को संसाधन जुटाने में सहायता प्रदान की है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी टीम न केवल हरित भारत की कल्पना को साकार कर रही है, बल्कि आदिवासी कला और संस्कृति को बढ़ावा देकर सतत विकास की दिशा में भी कार्य कर रही है।
डॉ. तिवारी ने छात्रों को बताया कि “पर्यावरण संरक्षण कोई विकल्प नहीं, बल्कि यह अब हमारी अनिवार्य जिम्मेदारी बन चुकी है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए हमें व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर छोटे लेकिन असरदार कदम उठाने होंगे।”
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विद्यालय प्रबंधन की सक्रिय भागीदारी
इस कार्यक्रम की सफलता में स्कूल प्रबंधन समिति, विशेष रूप से प्राचार्या श्रीमती संगीता सिंह, उप प्राचार्या और समन्वयक शिक्षकों की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। उन्होंने छात्रों को न केवल आयोजन से जोड़ा, बल्कि पर्यावरणीय चेतना को व्यवहार में उतारने का संदेश भी दिया।
रोटरी क्लब की प्रतिबद्धता
रोटरी क्लब वेस्ट की यह पहल संगठन की स्थिरता, हरित भविष्य और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को दर्शाती है। क्लब ने इस सत्र के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि वे न केवल समाज सेवा में, बल्कि पर्यावरण संरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों पर भी जागरूकता बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
छात्रों में दिखा उत्साह
सत्र के दौरान छात्रों ने पर्यावरण से जुड़ी जिज्ञासाओं को खुलकर साझा किया और डॉ. तिवारी से मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में “प्रकृति से संवाद” विषय पर एक लघु प्रस्तुति ने सभी को भावुक और जागरूक कर दिया।
यह आयोजन न केवल एक जागरूकता अभियान था, बल्कि एक प्रेरणा स्रोत भी बना, जो भावी पीढ़ी को हरित और टिकाऊ भारत के निर्माण की दिशा में सोचने और कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
झारखंड
निजी स्कूलों में आदेश की अवहेलना कर किताबों की बिक्री, अभिभावक संघ ने की कार्रवाई की मांग

जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिला के कई निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा विभाग के स्पष्ट आदेशों की अवहेलना करते हुए स्कूल परिसर में किताबों की बिक्री जारी रखने का मामला सामने आया है। इस पर नाराजगी जताते हुए जमशेदपुर अभिभावक संघ ने उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को पत्र सौंपकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया है कि झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 की धारा 7(अ)(3) के अनुसार स्कूल परिसर का उपयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। इसके तहत स्कूल किसी भी प्रकार के व्यापारिक गतिविधि, जैसे किताबें, यूनिफॉर्म या जूते आदि की बिक्री के लिए अभिभावकों या छात्रों को बाध्य नहीं कर सकता।
जारी हैं व्यवसायिक गतिविधियाँ, आदेश की हो रही अनदेखी
अभिभावक संघ ने दावा किया है कि despite विभागीय आदेशों के बावजूद, जमशेदपुर के कुछ प्रतिष्ठित निजी स्कूल – जैसे सेंट मैरी स्कूल बिस्टुपुर, चिन्मया स्कूल बिस्टुपुर और जुस्को स्कूल बिस्टुपुर, अपने परिसरों में किताबों की बिक्री कर रहे हैं। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव भी डालता है।
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पिछले आदेशों की भी हो रही अनदेखी
ज्ञात हो कि जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा पूर्व में भी स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि:
- स्कूल परिसर का उपयोग केवल शिक्षण कार्यों के लिए किया जाए।
- स्कूल किसी भी विशेष विक्रेता से सामग्री खरीदने के लिए छात्रों को बाध्य न करें।
- किसी भी परिस्थिति में परिसर में किताब या अन्य शैक्षणिक सामग्री की बिक्री न हो।
अभिभावक संघ का कहना है कि इन आदेशों के बावजूद कई स्कूल खुलेआम इन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, जो न केवल गैरकानूनी है बल्कि नैतिक रूप से भी अनुचित है।
कार्रवाई की मांग
डॉ. उमेश कुमार ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि ऐसे सभी स्कूलों पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप न्यायसंगत कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी संस्था शिक्षा के नाम पर व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा न दे सके।
संघ ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई है और चेताया है कि यदि इस पर जल्द कदम नहीं उठाया गया, तो अभिभावकों द्वारा जन आंदोलन भी शुरू किया जा सकता है।
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